पेरिस, 27 अप्रैल 2024। फ्रांस की संसद ने हाल ही में ‘सहायक मृत्युदंड विधेयक’ को मंजूरी दे दी है, जो गंभीर बीमार मरीजों को उनकी इच्छा अनुसार जीवन समाप्त करने का कानूनी अधिकार प्रदान करता है। इस कानून के तहत कई कड़े सुरक्षा उपाय लागू किए गए हैं ताकि लाभार्थी के निर्णय की स्वतंत्रता के साथ साथ उनकी सुरक्षा भी सुनिश्चित की जा सके।
विधेयक को लेकर देश में चर्चा का माहौल बना हुआ है। समर्थक इसे एक महत्वपूर्ण मानवाधिकार और अंतिम समय में मानवीय विकल्प के रूप में देखते हैं। उनका कहना है कि यह कानून उन बीमारों के लिए राहत लेकर आएगा, जो अत्यधिक दर्द और पीड़ा सहन कर रहे हैं और जिनके लिए जीवन की गुणवत्ता न्यूनतम रह गई है। इसके अलावा, वे इस बात पर जोर देते हैं कि विधेयक कड़े नियम और नैदानिक जांच के बाद ही सहायक मृत्युदंड के निर्णय की अनुमति देता है।
वहीं, आलोचक इस विधेयक के कुछ जोखिमों को लेकर चिंता जता रहे हैं। उनकी चिंता यह है कि कमजोर या मानसिक रूप से अस्थिर लोगों को भ्रष्टाचार या दबाव के तहत गलत दिशा में प्रभावित किया जा सकता है। साथ ही, वे मानते हैं कि समाज को ऐसे विकल्प की बजाय पेंलेटिव केयर और मानसिक सहायता को अधिक मजबूत करना चाहिए।
सरकार ने अपनी ओर से स्पष्ट किया है कि विधेयक में अनेक तरह की सुरक्षा पद्धतियां शामिल हैं, जिनमें डॉक्टरों की सहमति, मरीज की लिखित अनुमति, और कई स्वतंत्र समीक्षा समितियों की जांच शामिल है। सरकार का दावा है कि यह विधेयक मरीजों और चिकित्सा कर्मियों दोनों को समान रूप से सुरक्षित रखेगा।
इस कानून की मंजूरी के बाद फ्रांस उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है, जहां चिकित्सकीय सहायक मृत्युदंड कानूनी मान्यता प्राप्त है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम जीवन के अंतिम चरण में व्यक्तिगत स्वतंत्रता और सम्मान की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रगति है, परन्तु इसके व्यापक प्रभावों को देखने के लिए समय की आवश्यकता होगी।
फ्रांस के नागरिक और अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस विधेयक पर मिश्रित प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं, जबकि कई मानवाधिकार संगठनों ने इसे स्वागत योग्य बदलाव बताया है। अब देखना होगा कि यह कानून किस प्रकार प्रभावी साबित होता है और समाज पर इसका क्या प्रभाव पड़ता है।

