लंदन। प्रोस्टेट कैंसर के इलाज में नई उपचार तकनीक ने इलाज के दौरान होने वाले साइड इफेक्ट्स की संभावना को कम करने में मदद की है। नेशनल हेल्थ सर्विस (NHS) द्वारा किए गए एक दस साल के अध्ययन में यह बात सामने आई है कि फोकल थेरेपी नामक कम आक्रामक उपचार विकल्प से मरीजों की जीवन गुणवत्ता बेहतर बनी रहती है।
इस अध्ययन में करीब 3,500 पुरुषों की देखरेख की गई, जिन्होंने फोकल थेरेपी प्राप्त की। यह तकनीक कैंसरग्रस्त अंग के केवल प्रभावित हिस्से को लक्षित करता है, जिससे पूरे प्रोस्टेट को हटाने वाले पारंपरिक ऑपरेशन या रेडिएशन थेरेपी से उत्पन्न होने वाले दुष्प्रभाव कम हो जाते हैं।
डॉक्टर्स का कहना है कि इस इलाज पद्धति से यूरिनेशन और यौन संबंधी समस्याओं जैसे आम गंभीर साइड इफेक्ट्स में कमी देखी गई है। इससे पहले पारंपरिक उपचारों के कारण मरीजों को लंबे समय तक इन दुष्प्रभावों का सामना करना पड़ता था।
अध्ययन की प्रमुख शोधकर्ता डॉ. एलेक्सा फिशर ने बताया कि “फोकल थेरेपी ने मरीजों में कैंसर नियंत्रण के साथ-साथ जीवन स्तर में सुधार किया है। यह तरीका हमारे लिए एक मील का पत्थर साबित हो सकता है।”
NHS के अनुसार, यह तकनीक हर रोगी के लिए उपयुक्त नहीं हो सकती, लेकिन उचित चयन के बाद यह विकल्प काफी प्रभावशाली रहा है। इस उपचार में शरीर पर चोट कम लगती है, रिकवरी तेज होती है और अस्पताल में रहने का समय भी घटता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि फोकल थेरेपी भविष्य में प्रोस्टेट कैंसर के प्रबंधन में एक अहम भूमिका निभा सकता है, खासकर उन मरीजों के लिए जिनमें कैंसर का पता जल्दी लग जाता है और जिसकी सीमा सीमित होती है।
अधिकतर मामलों में, चिकित्सकों ने यह बताया कि इलाज के बाद मरीजों ने अपनी सामान्य दिनचर्या जल्दी पुनः शुरू कर ली और उनकी मनोवैज्ञानिक स्थिरता भी बेहतर रही।
इस अध्ययन को विशेषज्ञों ने विश्वसनीय और प्रगतिशील माना है, जो कि कैंसर उपचार के नए विकल्प खुलने का संकेत देता है। ऐसे में भविष्य में और अधिक अनुसंधान और जाँच के आधार पर इस तकनीक को व्यापक रूप से लागू किया जा सकता है।

