लंदन: इंग्लैंड के सभी नवजात शिशुओं को एक बड़ी अध्ययन पहल के तहत स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA) नामक आनुवंशिक बीमारी के लिए परीक्षण किया जाएगा। यह परीक्षण स्वास्थ्य सेवा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे इस गंभीर बीमारी का प्रारंभिक पता लगाना और इलाज संभव होगा।
स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी एक दुर्लभ, लेकिन गंभीर आनुवंशिक स्थिति है जो मांसपेशियों की कमजोरी और नियंत्रण में कटौती का कारण बनती है। इस बीमारी में स्पाइनल कॉर्ड में मोटर न्यूरॉन्स प्रभावित होते हैं, जिससे रोगी की गतिशीलता कम हो जाती है।
नए परीक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य नवजात शिशुओं में इस बीमारी का जल्दी पता लगाना है ताकि उन्हें समय पर उपचार मिल सके, जिससे जीवन की गुणवत्ता में सुधार हो। इस जनसंख्या-स्तर पर अध्ययन से SMA के इलाज के लिए नई रणनीतियों और दवाओं के विकास में मदद मिलेगी।
डॉक्टर रिचर्ड हेंडरसन, जिन्होंने इस अभियान की अगुवाई की है, ने कहा, “स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी के लिए शुरुआती पहचान से हम प्रभावी हस्तक्षेप कर पाएंगे, जो शिशुओं के जीवन को बचाने और बेहतर बनाने में मदद करेगा।”
स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, इस परीक्षण से जीवन रक्षक चिकित्सा हस्तक्षेप को बढ़ावा मिलेगा और रोग का बारीक विवरण समझने में सहायता मिलेगी। इसके अलावा, इस परीक्षण को राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा (NHS) के तहत सभी अस्पतालों में लागू किया जाएगा, जिससे हर नवजात शिशु तक इसका लाभ पहुँच सके।
एसएमए के उपचार में हाल के वर्षों में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है, जिसमें जीन थेरेपी और अन्य उन्नत उपचार शामिल हैं। इस परीक्षण से पहचान होने पर इन उपचारों को समय पर शुरू करना संभव हो सकेगा।
आपातकालीन निगरानी और समुचित निदान की वजह से मरीजों के लिए परिणाम बेहतर होंगे। अंग्रेजी स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि यह पहल अब तक की सबसे बड़ी और पूरक योजना है, जो नवजात परीक्षण को और अधिक व्यापक बनाएगी।
इस महत्त्वपूर्ण परीक्षण के माध्यम से, इंग्लैंड स्वास्थ्य सेवा ने एक बार फिर दिखा दिया है कि वह नवाचार और रोग निवारण के क्षेत्र में अग्रणी है।

