नई दिल्ली, 22 जुलाई 2026: कांग्रेस नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और अन्य विपक्षी नेताओं को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास के बाहर धरने के दौरान हिरासत में लिए जाने के बाद कई राज्यों में राजनीतिक प्रदर्शन तेज हो गए हैं। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी (सपा) और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने केंद्र सरकार पर लोकतांत्रिक असहमति दबाने का आरोप लगाया है।
प्रधानमंत्री निवास के बाहर अचानक आयोजित इस प्रदर्शन का उद्देश्य केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले और परीक्षा विवाद के दौरान छात्रों पर पुलिस की कार्रवाई के चलते उनकी तत्काल इस्तीफा माँगना था।
राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कई विपक्षी नेता उच्च सुरक्षा क्षेत्र में धरने पर बैठे, लेकिन प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह और गृह सचिव गोविंद मोहन के प्रयासों के बाद भी जब ये नेता वापस नहीं गए तो उन्हें पुलिस ने हटाकर हिरासत में ले लिया। बाद में ये नेता रिहा कर दिए गए।
इन गिरफ्तारीयों ने देश के कई राज्यों में विरोध प्रदर्शन भड़का दिए। अरुणाचल प्रदेश में कांग्रेस ने पुलिस कार्रवाई को ‘मनमाना और गैरकानूनी’ बताया तथा भाजपा नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की ‘तानाशाह मानसिकता’ का आरोप लगाया। राज्य कांग्रेस अध्यक्ष बोसिराम सिराम ने कहा कि लोकसभा में विपक्ष के नेता और अन्य वरिष्ठ नेताओं की गिरफ्तारी सीधे तौर पर भारत के संसदीय लोकतंत्र, संविधान, कानून और मौलिक अधिकारों पर हमला है।
कोलकाता की सड़कों पर भारतीय युवा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने छात्रों पर हुए पुलिस हमले और राहुल गांधी की गिरफ्तारी के खिलाफ रैली निकाली। मुंबई में शिवसेना (यूबीटी) के आदित्य ठाकरे ने कहा, “पहली बार यह स्पष्ट है कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण थे जबकि सरकार हिंसक हो रही है।” भोपाल में कांग्रेस नेताओं ने मध्य प्रदेश विधानसभा में राज्य सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया।
कांग्रेस ने गिरफ्तार नेताओं, छात्रों और पार्टी कार्यकर्ताओं के प्रति एकजुटता जताई और उनकी तत्काल रिहाई, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, परीक्षा में अनियमितताओं पर व्यापक संसदीय चर्चा एवं दिल्ली में हाल के प्रदर्शनों में शामिल छात्रों पर दर्ज मुकदमों को वापस लेने की मांग की।
उत्तर प्रदेश में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने लखनऊ, अमेठी, बाराबंकी और झांसी में प्रदर्शन किया, जहां पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। लखनऊ में अधिकारियों ने कहा कि लगभग 250-300 लोगों को एको गार्डन में निवारक हिरासत में लिया गया, जिनमें से अधिकांश अटल चौक के समीप प्रदर्शन कर रहे थे।
सपा ने दिल्ली में हुए विरोध प्रदर्शनों में शामिल अपने अध्यक्ष अखिलेश यादव की गिरफ्तारी की निंदा की, जबकि कांग्रेस के कार्यकर्ता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा के समर्थन में मार्च निकाल रहे थे। प्रदर्शनकारियों ने सरकार पर लोकतांत्रिक अधिकारों को कमजोर करने का आरोप लगाया और विपक्षी नेताओं की तुरन्त रिहाई की मांग की।
मध्य प्रदेश में विपक्ष के नेता उमंग सिंघार के नेतृत्व में कांग्रेस विधायकों ने विधानसभा परिसर में मुख्यमंत्री कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया, वहीं राज्य कांग्रेस अध्यक्ष जितु पटवारी ने राजभवन के बाहर प्रदर्शन का नेतृत्व किया। पटवारी समेत कई कार्यकर्ताओं को अस्थायी रूप से हिरासत में लिया गया, बाद में छोड़ दिया गया।
सिंघार ने वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं की गिरफ्तारी की निंदा करते हुए भाजपा सरकार की ‘तानाशाह’ प्रवृत्ति को उजागर किया तथा आरोप लगाया कि राज्य सरकार छात्रों की समस्याओं पर विधानसभा में चर्चा करने से मना कर रही है। उन्होंने कहा कि विधान मामलों के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने विधानसभा परिसर में छात्रों का अपमान किया।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री व तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने भी दिल्ली में पुलिस कार्रवाई की आलोचना की और इसे ‘अस्वीकार्य’ बताया। उन्होंने अपनी पार्टी का विपक्षी नेताओं के धरने का समर्थन किया। सोशल मीडिया पर उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा युवाओं पर पुलिस अत्याचार करने का आरोप लगाया और टीएमसी के द्वारा भाजपा के ‘तानाशाही रवैये’ के खिलाफ संघर्ष जारी रखने का संकल्प जताया। ममता ने यह भी कहा कि भाजपा कार्यकर्ताओं ने कोलकाता में उनकी पार्टी के शहीद दिवस कार्यक्रम की तैयारियों में बाधा डाली है, जिसमें तोड़फोड़ और धमकियां शामिल हैं।
टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने कहा कि राहुल गांधी के साथ जो व्यवहार हुआ वह संसदीय लोकतंत्र के लिए नीचा दिखाने वाला है और विपक्ष एक आवश्यक संवैधानिक संस्था है जिसे धमकाने से जवाबदेही नहीं टाली जा सकती।
देशव्यापी प्रदर्शन NEET-UG 2026 पेपर लीक के अगले दिन संसद के निकट हुए बड़े प्रदर्शन के बाद शुरू हुए थे, जिनमें पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए बल प्रयोग किया था। विपक्ष लगातार केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और परीक्षा प्रणाली में सुधार पर व्यापक बहस की मांग कर रहा है।
एजेंसी इनपुट्स के साथ

