नई दिल्ली: देश भर में अस्वीकृत स्कूलों (unrecognised schools) की संख्या तेजी से बढ़ रही है, जिससे हजारों छात्र अनिश्चित भविष्य की स्थिति में फंसे हुए हैं। ये स्कूल बिना किसी वैधानिक स्वीकृति के शिक्षा प्रदान कर रहे हैं, जिससे न केवल छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है बल्कि उनकी संभावनाएं भी कम हो रही हैं।
शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, अस्वीकृत स्कूलों की वजह से देश के शिक्षा तंत्र पर प्रभाव पड़ रहा है। ये स्कूल न तो सरकारी मानकों के अनुरूप हैं और न ही उनकी पढ़ाई का स्तर समान्य मान्यता प्राप्त बोर्डों के समकक्ष रहता है। इसका सीधा असर छात्रों के भविष्य पर पड़ता है, क्योंकि इन स्कूलों से पास हुए छात्र उच्च शिक्षा ग्रहण करने या सरकारी नौकरियों के लिए आवेदन करने में कठिनाइयों का सामना करते हैं।
राज्यों की शिक्षा विभागों से मिली जानकारी में पता चला है कि पिछले पांच वर्षों में ऐसे स्कूलों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इसका मुख्य कारण इन स्कूलों की ऊंची पाठ्य शुल्क व सस्ती क़िस्तों में नेटवर्किंग करना बताया जा रहा है, जिससे गरीब परिवार भी शिक्षा के नाम पर फंस जाते हैं।
अब सवाल ये उठता है कि सरकार इस स्थिति को सुधारने के लिए क्या कदम उठा रही है? शिक्षा मंत्रालय ने अस्वीकृत स्कूलों को वैधानिक बनाने के लिए कई अभियान शुरू किए हैं, जिनमें मानकीकरण प्रक्रिया की अनुशंसा की गई है। इसके अंतर्गत इन स्कूलों को शिक्षा गुणवत्ता, बुनियादी ढांचा और शिक्षक योग्यता के मानदंडों के अनुसार जांचा जा रहा है। यदि जरूरी सुधार नहीं होते हैं तो इन स्कूलों को बंद करने की कार्रवाई भी प्राथमिकता में रखी जा रही है।
वहीं, अस्वीकृत स्कूलों में पढ़ रहे छात्रों के अभिभावक भी अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित हैं। उन्होंने सरकार से निवेदन किया है कि बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो और उन्हें उचित विकल्प उपलब्ध कराए जाएं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह समस्या केवल शिक्षा विभाग का नहीं बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है। उचित निगरानी, समय-समय पर निरीक्षण और शिक्षा संबंधी जागरूकता से ही इस बीमारी का समुचित निदान संभव हो सकेगा। सरकार, अभिभावक व शिक्षक मिलकर ही इस दिशा में सार्थक कदम उठा सकते हैं।
संक्षेप में कहा जाए तो अस्वीकृत विद्यालयों की स्थिति हमारे शिक्षा तंत्र के लिए एक गंभीर चुनौती है, जिसका समाधान नितांत आवश्यक है ताकि छात्रों का भविष्य सुरक्षित और उज्जवल बन सके।

