Headline
Watch: The science and strides of India’s solar powerhouse
देखिए: भारत की सौर ऊर्जा शक्ति का विज्ञान और प्रगति
സമ്പൂർണ്ണാവതാര നമസ്‌കാരം Vishnu Sampoorna Avathara Namaskaram Lyrics
संपूर्णावतार नमस्कारम: विष्णु के दस अवतारों के भजन歌词
UN, strapped for cash, warns time running out to make payments
संयुक्त राष्ट्र कोष संकट में, भुगतानों के लिए समय समाप्ति की चेतावनी
CBI questions former Trinamool MLA in R.G. Kar rape and murder case
सीबीआई ने आर.जी. कर बलात्कार एवं हत्या मामले में पूर्व तृणमूल विधायक से पूछताछ की
Indian Navy’s INS Trikand thwarts piracy attempt on merchant vessel in Gulf of Aden
भारतीय नौसेना के INS त्रिकंद ने अदन की खाड़ी में व्यापारी जहाज पर समुद्री डकैती की कोशिश नाकाम की
AMMA crisis: Actor Shwetha Menon says ‘will continue’ as president till next election
अम्मा संकट: अभिनेत्री श्वेता मेनन ने कहा ‘अगले चुनाव तक अध्यक्ष पद जारी रखूंगी’
'We will be front page news after this' - Tucker toasts 'absolutely incredible' Ireland effort
‘‘हम इसके बाद पहले पन्ने की खबर बनेंगे’’ – टकर ने आइरिश प्रयास को ‘पूरी तरह अद्भुत’ बताया
Nakshatras to Avoid for Borrowing Money, Loans & Financial Transactions
ऋण, उधारी और वित्तीय लेन-देन के लिए बचने योग्य नक्षत्र
Data analysis finds a common cricket wisdom may be a myth
डेटा विश्लेषण से पता चला कि क्रिकेट की एक सामान्य धारणा myth हो सकती है
British Museum funds research on Kashmir’s last houseboat makers and the vanishing craft

श्रीनगर। कश्मीर की पारंपरिक हाउसबोट शिल्पकला, जो दशकों से नई निर्माण पर प्रतिबंध के कारण धीरे-धीरे लुप्त होती जा रही है, अब संरक्षण और दस्तावेजीकरण के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। ब्रिटिश म्यूजियम ने पुणे की एक टीम द्वारा इस कला को बचाने और इसके अंतिम शिल्पकारों को सहेजने के लिए एक विशेष परियोजना को वित्तीय सहायता देने का निर्णय लिया है।

हाउसबोट्स, जो कश्मीर के पर्यटन और सांस्कृतिक पहचान का अहम हिस्सा हैं, पिछले कुछ वर्षों में नई निर्माण पर लगे प्रतिबंधों के कारण तेजी से कम हो गए हैं। ये झूले हुए नौका-घर, डल झील की खासियत माने जाते हैं और स्थानीय कारीगरों की अनूठी मेहनत का परिणाम हैं। लेकिन जैसे-जैसे समय बीत रहा है, इनके शिल्प कौशल में भी कमी आती जा रही है, खासतौर पर तब जब युवाओं में इस कला को सीखने की रुचि घट रही है।

ब्रिटिश म्यूजियम के इस समर्थन से पुणे की टीम ने हाउसबोट बनाने वाले अंतिम कारीगरों के जीवन, उनके कारीगरी के तरीकों और उनके अनुभवों को रिकॉर्ड करना शुरू कर दिया है। साथ ही, यह परियोजना शिल्पकला को जीवित रखने के लिए आवश्यक संसाधन और जागरूकता बढ़ाने का कार्य भी करेगी।

परियोजना के प्रमुख शोधकर्ता ने बताया, “यह शिल्पकला न केवल कश्मीर की परंपरा का हिस्सा है, बल्कि स्थानीय समुदाय की पहचान और रोजगार का स्रोत भी है। नए निर्माण पर प्रतिबंध ने इस कला को संकट में डाल दिया है, और हमारी कोशिश है कि इन शिल्पकारों की कथाओं और कौशल को संरक्षित किया जाए।”

स्थानीय विशेषज्ञों का मानना है कि हाउसबोट निर्माण पर प्रतिबंध के बावजूद, इस कला को विभिन्न माध्यमों से जीवित रखा जा सकता है। इसके लिए सरकार और अन्य संस्थानों से भी सहयोग की आवश्यकता है ताकि कारीगरों को पुनः प्रोत्साहन मिल सके और उनकी विरासत भविष्य की पीढ़ियों तक पहुंच सके।

इस परियोजना के चलते हाउसबोट शिल्पकारों के अनुभव, उनके द्वारा उपयोग की जाने वाली तकनीकें और कश्मीर की सांस्कृतिक धरोहर के इस अनमोल पहलू को व्यापक पैमाने पर प्रलेखित किया जाएगा। ब्रिटिश म्यूजियम की ओर से मिली सहायता से उम्मीद जताई जा रही है कि भविष्य में इस कला को पुनः संवारा जा सकेगा और विश्व स्तर पर इसकी महत्ता को समझा जा सकेगा।

हालांकि कश्मीर में राजनीतिक अस्थिरता और आर्थिक चुनौतियों के बीच सांस्कृतिक विरासत की रक्षा एक जटिल विषय है, फिर भी इस तरह के प्रयास एक सकारात्मक संकेत के रूप में देखे जा रहे हैं। स्थानीय समुदायों का सहयोग और सरकार की नीतियां इसी दिशा में निर्णायक भूमिका निभाएंगी।

अंत में कहा जा सकता है कि कश्मीर की हाउसबोट कला की विरासत को बचाने और बढ़ावा देने के लिए ब्रिटिश म्यूजियम का यह कदम एक महत्वपूर्ण पहल है। यह परियोजना केवल शिल्प कला की रक्षा नहीं करेगी, बल्कि कश्मीर की सांस्कृतिक पहचान को भी मजबूत बनाएगी और विश्वभर में इसकी महत्ता को स्थापित करेगी।

Source