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Why ESIC decided to directly run new hospitals: The West Bengal trigger
ईएसआईसी ने नए अस्पताल सीधे चलाने का फैसला क्यों किया: पश्चिम बंगाल की ट्रिगर
As countries urbanise, 38% of world's population will live in large cities by 2100: Study
जैसे-जैसे देश शहरीकरण की ओर बढ़ेंगे, 2100 तक दुनिया की 38% आबादी बड़े शहरों में रहेगी: अध्ययन
'Disbelief' in India camp after a failure to adapt to 'fantastic' Ireland
भारत के कैंप में ‘आश्चर्य और असमंजस’ ने लिया जन्म, ‘शानदार’ आयरलैंड के खिलाफ अनुकूलन में नाकामी
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सिर्फ 10.2% महिलाएं ही मैदान में उतरीं, 2023 में महिला विधेयक पारित होने के बाद 20 विधानसभा चुनावों में: रिपोर्ट
Through The Magnificent Life, artist Rajesh RV imagines a world of harmony and hope
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Ancient Aaykkudi Temple Discovered in Vizhinjam | Kerala Temple History
विजीनजं में प्राचीन अय्यकुडी मंदिर की खोज | केरल मंदिर इतिहास
It’s a bad idea to scratch bug bites, research says
कीट के काटने पर खुजलाना एक गलत कदम है, शोध में बताया गया
What decides your height?
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Why is pregnancy sickness drug not easily accessible to all?
गर्भावस्था के दौरान बीमारी की दवा सभी के लिए उपलब्ध क्यों नहीं है
Story of Virabhadra Avatara | The Wrath of Shiva

नई दिल्ली, 27 अप्रैल: हिंदू धर्म में शिव भगवान के एक प्रखर अवतार, वीरभद्र, की कहानी सदियों से प्रचलित है। यह कहानी भगवान शिव के क्रोध और न्याय के प्रतीक के रूप में देखी जाती है। इस विशेष अवतार का उद्भव तब हुआ जब शिव की पुत्री संति के पिता दाक्ष, जो ब्रह्मा के पुत्र और एक शक्तिशाली राजा थे, ने भगवान शिव का अपमान किया।

दाक्ष ने अपनी पुत्री संति का विवाह भगवान शिव से कराया, क्योंकि संति शिव के प्रति गहरी श्रद्धा और भक्ति रखती थीं। हालांकि दाक्ष को शिव से वैमनस्य था, फिर भी यह विवाह सम्पन्न हुआ। वर्षों बाद, दाक्ष ने एक भव्य स्वयंवर का आयोजन किया जिसमें उसने समस्त देवताओं और राजाओं को आमंत्रित किया, परंतु शिव को जानबूझकर छोड़ दिया। इस अपमान से संति अत्यंत कुंठित हुईं, लेकिन उन्होंने अपने पिता के सम्मान की खातिर इस समारोह में भाग लिया।

समारोह के दौरान दाक्ष ने शिव का कटु अपमान किया, जिससे संति का हृदय टूट गया। भगवान शिव के प्रति अपनी अनन्य भक्ति के बावजूद, वे इस अपमान को सहन नहीं कर सकीं और उन्होंने खुद को अग्नि में समर्पित कर दिया। इस घटना से शिव क्रुद्ध हो उठे और उन्होंने वीरभद्र का सृजन किया, जो उनके गुस्से का प्रचंड अवतार था।

वीरभद्र ने दाक्ष के स्वयंवर में पहुंचकर समस्त अतिथियों का संहार किया और दाक्ष की हत्या भी की। इसके बाद शिव ने संति की अस्थियों को अपने हाथों से लेकर कैलाश पर्वत पर विसर्जित किया, जो शक्ति पीठ के रूप में प्रसिद्ध हुआ।

यह कथा धार्मिक ग्रंथों में न्याय, भक्ति, और शक्ति के प्रतीक के रूप में वर्णित है। वीरभद्र का अवतार, शिव के क्रोध और धर्म के रक्षक के रूप में जानी जाती है। आज भी श्रद्धालु इस कहानी को याद कर भगवान शिव की महिमा और न्यायप्रिय चरित्र का सम्मान करते हैं। इस प्रकार, वीरभद्र का जन्म न केवल शिव की क्रोध का परिणाम था, बल्कि धर्म की रक्षा के लिए एक आवश्यक घटना थी।

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