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नई दिल्ली: समुद्री जीवन के रहस्यों को समझने में विज्ञान ने एक नया महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। शोधकर्ताओं ने हाल ही में यह पता लगाया है कि स्पर्म व्हेल, जो अपनी बातचीत के लिए खास ‘क्लिकिंग’ ध्वनियों का उपयोग करती हैं, अपनी इन आवाज़ों में विभिन्नताएं उत्पन्न करती हैं जो मानव भाषण में स्वरों (वॉवेल्स) की तरह लगती हैं।

स्पर्म व्हेल, जो प्रकृति के सबसे बड़े दांसपूंछ वाले जीवों में से एक हैं, अपनी संवाद प्रणाली के लिए जानी जाती हैं। इन्हें समुद्र के सबसे जटिल और दूरस्थ संचारकों में गिना जाता है। शोधकर्ताओं ने अध्ययन के दौरान पाया कि ये व्हेल न केवल विभिन्न प्रकार की क्लिक ध्वनियां करती हैं, बल्कि इनमें ध्वनि की विभिन्न विशेषताओं को भी बदलती हैं जो मानव भाषण की तरह अर्थपूर्ण पैटर्न बनाते हैं।

प्रमुख वैज्ञानिकों ने बताया कि स्पर्म व्हेल की ये क्लिक ध्वनियां उच्च आवृत्ति के पिंग जैसे हैं, जो वे एक-दूसरे के बीच संदेश भेजने के लिए उत्पन्न करती हैं। लेकिन नई खोज ने यह समझने में सहायता की कि ये पिंग केवल एक जैसी नहीं होतीं, बल्कि भिन्न-भिन्न स्वरूपों और आवृत्तियों में होती हैं। यह स्थिति मानव भाषण की तरह है, जिसमें स्वर हमारे संवाद की ध्वनि और अर्थ तय करते हैं।

शोध के अनुसार, स्पर्म व्हेल के ये क्लिक पैटर्न उनके सामाजिक व्यवहार, स्थान और शिकार की स्थिति जैसे कारकों के आधार पर बदलते रहते हैं। वैज्ञानिकों ने इस पर भी जोर दिया कि इस खोज से हमें समुद्री मस्तिष्क विज्ञान और जीवों की संचार प्रणाली को समझने में गहराई मिलेगी।

स्पर्म व्हेल की बातचीत की इस नई व्याख्या से यह साफ होता है कि प्राकृतिक दुनिया में संवाद की जटिलता मानव सीमाओं से कहीं अधिक व्यापक और विविध है। इससे संबंधित आगे के अध्ययन समुद्री जीवन की भाषा और उनके सामाजिक तंत्र को बेहतर ढंग से समझने में मदद कर सकते हैं।

यह शोध समुद्री जीवों के संरक्षण और उनके पर्यावरण के महत्व को भी उजागर करता है, क्योंकि अच्छा संवाद समुद्री सामूहिक व्यवहार और अस्तित्व के लिए आवश्यक है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस खोज से भविष्य में कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित संचार तकनीकों के विकास में भी मदद मिलेगी।

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