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G7 leaders tackle reliance on China for critical minerals
G7 नेता चीन पर निर्भरता कम करने के लिए समावेशी रणनीति पर विचार कर रहे हैं
Ageing population and rising debt could push Tamil Nadu towards a fiscal trap, says White Paper
बढ़ती उम्रदराज आबादी और बढ़ता ऋण तामिलनाडु को आर्थिक जाल में फंसाने का खतरा: व्हाइट पेपर
Heatwaves and ozone together increase India’s cardiac deaths: study
भारत में गर्मी की लहर और ओजोन के कारण हृदय रोग से मौतों में वृद्धि: अध्ययन
‘Shrek 5’ trailer: Shrek and Donkey reunite for a new adventure
शेरेक 5 ट्रेलर: शेरेक और डंकी फिर साथ नए रोमांच के लिए
Hindu prayers made mandatory in Chhattisgarh’s State schools; govt imposing RSS agenda, says Congress
छत्तीसगढ़ के राज्य विद्यालयों में हिंदू प्रार्थनाएँ अनिवार्य; कांग्रेस ने कहा- सरकार आरएसएस एजेंडा लागू कर रही है
Glenmorangie’s single malt Scotch whisky, Lasanta, arrives in Kolkata
ग्लेनमोरांगी का सिंगल माल्ट स्कॉच व्हिस्की, लसांता, कोलकाता में लॉन्च
Stock markets extend rally in early trade on drop in crude oil prices
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के साथ स्टॉक मार्केट में तेजी जारी
Hoarding row erupts ahead of Rahul Gandhi’s Kota event, Gehlot alleges BJP ‘fear’
राहुल गांधी के कोटा कार्यक्रम से पहले होर्डिंग विवाद, गहलोत ने भाजपा पर ‘डर’ का आरोप लगाया
Recovery of Ebola patients offers rare moments of joy at epicentre of outbreak
इबोला मरीजों के ठीक होने से महामारी के केंद्र में मिल रहे हैं खुशी के अनमोल पल

{“title_results”:[“श्री पार्वती नीलकंठ स्तोत्रम मलयालम बोल”]’).content_results”:[“कोच्चि, 27 अप्रैल 2024: श्री पार्वती नीलकंठ स्तोत्रम के मलयालम लिरिक्स ने हाल में हिंदू धार्मिक संगीत प्रेमियों और साहित्यिक समूहों के बीच खासा ध्यान आकर्षित किया है। इस स्तोत्र की मधुर छंदबद्ध कविताएं और गहन अर्थ इसे श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत पूजनीय बनाते हैं।नीलकंठ, जो भगवान शिव का एक महत्वपूर्ण नाम है, को समर्पित यह स्तोत्र पार्वती के प्रति उनके अथाह प्रेम और भक्ति की अभिव्यक्ति है। प्रत्येक श्लोक में शिव-परिवार की दिव्यता और उनकी लीलाओं का वर्णन है, जिसमें खास तौर पर पार्वती की भक्ति का उल्लेख मिलता है। मलयालम भाषा में इस स्तोत्र की प्रस्तुति ने दक्षिण भारत के कोड़ों में इसकी पहुंच को और भी अधिक बढ़ा दिया है।धार्मिक विद्वानों का कहना है कि यह स्तोत्र न केवल आध्यात्मिक शांति प्रदान करता है, बल्कि यह शिव की महिमा को भी बढ़ावा देता है। इसका संगीत स्वरूप पूजा पाठ के दौरान मंदिरों और घरों में विशेष रूप से लोकप्रिय हो रहा है। इस स्तोत्र की पढ़ाई और गायन से भक्तों को मानसिक शांति, स्वास्थ्य लाभ और मानसिक स्थिरता की अनुभूति होती है।विशेषज्ञों के अनुसार, इस स्तोत्र के हर एक पद में भगवान शिव के विभिन्न रूपों और उनकी शक्तियों का विवरण है, जो भक्तों के लिए अत्यंत प्रेरणादायक और आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करता है। पारंपरिक मलयालम लिपि में इसे पढ़ने और समझने से भक्तों की भक्ति में वृद्धि होती है और वे अपने दैनिक जीवन में शिव-शक्ति की भावना को महसूस कर पाते हैं।नागरिक और युवाओं के बीच भी इस स्तोत्र की लोकप्रियता व्यापक हो रही है, विशेष रूप से सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से। इससे हिंदू धार्मिक साहित्य के संरक्षण और प्रोत्साहन में भी मदद मिल रही है। सरकारी और गैर-सरकारी संगठनों द्वारा इस स्तोत्र के डिजिटल संस्करण और ऑडियो संसाधन भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे यह सभी वर्गों के लिए सुलभ हो गया है।इस प्रकार, श्री पार्वती नीलकंठ स्तोत्रम न केवल एक धार्मिक ग्रंथ है, बल्कि यह सांस्कृतिक विरासत एवं आध्यात्मिक जागरूकता का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है। इसके मलयालम लिरिक्स ने इसे दक्षिण भारतीय सांस्कृतिक क्षेत्र में एक विशेष स्थान दिलाया है, जो आने वाले वर्षों में भी अपनी प्रसिद्धि और श्रद्धा बनाए रखेगा।”]}

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{ “title_results”: [ “वीजा और नौकरी की चिंताओं के बीच अमेरिकी भारतीय छात्र तीव्र शिक्षा ऋण चुकौती कर रहे हैं” ], “content_results”: [ “नई दिल्ली: अमेरिका में अध्ययनरत भारतीय छात्रों द्वारा शिक्षा ऋण की अदायगी की गति बढ़ाने का रुझान देखने को मिल रहा है। इस बदलाव के पीछे मुख्य कारण कोविड-19 के बाद बढ़ती नौकरी सुरक्षा की चिंता और संभावित रूप से भारत में वापस लौटने की संभावना बताई जा रही है। कई छात्र अब आम किस्तों के बजाए अधिकतम किस्तों और एकमुश्त भुगतान के माध्यम से अपने ऋण माफियाओं को जल्द से जल्द चुका रहे हैं।विशेषज्ञों का कहना है कि उच्च किस्तों का चयन करने वाले छात्र अपनी आर्थिक स्थिति को स्थिर रखने के साथ-साथ भविष्य में किसी भी अप्रत्याशित परिस्थिति से बचने की कोशिश कर रहे हैं। इसके अलावा, म〖 u0936u093fu0915u094du0937u093e u0935u093fu0936u094du0935u093eu0938u0930 u0915u0940 u092eu093fu0932u0940u091fu0940u092fu093eu0902 u0915u0947 u0932u093fu090f u090fu0915 u0938u0902u0916u094du092fu093e u0930u0939u093fu0915u093eu0930 u091cu0940u0935u0935u0930u094du0924u094du0924u093e u0915u0930u0924u093e u0939u0948u0902, u0915u0947u0939u0928 u0926u093fu092fu093e u0939u0948 u0915u093f u092fu0939 u0938u0947 u092fu093eu0924u0940 u0935u0940u0936u094du0935u093e u0915u093e u0938u093eu092eu093eu0917u094du0930 u092au0930u093fu0923u093eu092e u0915u094au0928 u092eu0947u0902 u092fu094bu0917u094du092f u0915u0940 u091cu093eu0908u0921 u0924u0947.”, “अमेरिका में अध्ययनरत भारतीय छात्र अपनी शिक्षा ऋण की अदायगी के लिए अपने वित्तीय प्रबंधन में परिवर्तन कर रहे हैं। छात्र अब अपनी किस्तों की संख्या कम कर अधिकतम राशि एक साथ चुका रहे हैं ताकि वे जल्द से जल्द ऋण मुक्त हो सकें। इस प्रवृत्ति के पीछे नौकरी की अनिश्चितता, वीजा संबंधित दिक्कतें और भारत वापस लौटने की संभावनाएं मुख्य हैं।”, “रिपोर्टों में बताया गया है कि कुछ संस्थान भी इस पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दे रहे हैं और छात्र हित में नई योजनाएं जारी कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की योजनाओं से छात्रों को लम्बे समय तक वित्तीय दबाव से बचने में मदद मिलेगी।”, “वहीं, भारतीय वित्तीय सलाहकार भी छात्रों को सलाह दे रहे हैं कि वे अपने ऋण का सही प्रबंधन करें और आवश्यकता होने पर वित्तीय विशेषज्ञ से संपर्क करें। भविष्य की अनिश्चितताओं को ध्यान में रखते हुए छात्रों को अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाना आवश्यक है।” ]” }

{ “title_results”: [ “वीजा और नौकरी की चिंताओं के बीच अमेरिकी भारतीय छात्र तीव्र शिक्षा ऋण चुकौती कर रहे हैं” ], “content_results”: [ “ नई दिल्ली: अमेरिका में अध्ययनरत भारतीय छात्रों द्वारा शिक्षा ऋण की अदायगी की गति बढ़ाने का रुझान देखने को मिल रहा है। इस बदलाव के पीछे मुख्य कारण कोविड-19 के बाद […]

अहमदाबाद में कांगो बिजनेसमैन का इबोला परीक्षण निगेटिव पाया गया

अहमदाबाद: हाल ही में अहमदाबाद में एक कांगो के व्यवसायी का इबोला वायरस परीक्षण निगेटिव पाया गया है। स्वास्थ्य अधिकारियों ने उनकी यात्रा इतिहास और लक्षणों को देखते हुए इबोला संदिग्ध स्थिति में प्रवेश कराकर सावधानी बरती थी, लेकिन परीक्षण के नतीजे आने के बाद अधिकारियों ने बताया कि चिंता की कोई बात नहीं है। […]

{“title_results”:[“एक सन्यासी और एक साधु की अनोखी दोस्ती: सबा महजूर की कॉलम”],”content_results”:[“देश में अक्सर धार्मिक मतभেদের कारण विवाद और दूरियां बढ़ती हैं, लेकिन कुछ उदाहरण ऐसे भी होते हैं जो इस धारा के विपरीत होते हैं। हाल ही में प्रकाश में आई एक अनोखी दोस्ती की कहानी ने लोगों के दिलों को छू लिया है, जहां एक नन (सन्यासी महिला) और एक ज्ञानी साधु न केवल अपने धार्मिक मतों में सहमति बनाए रखे, बल्कि वे एक-दूसरे के साथ समय बिताने और विचार-विमर्श करने में भी पीछे नहीं रहे।विवाद का विषय हो सकता था धर्म, लेकिन उनका रिश्ता इससे पूरी तरह परे था। दोनों ने कभी भी अपने धार्मिक मतों को लेकर सिर नहीं झगड़ा, बल्कि हमेशा एक-दूसरे की सोच और दृष्टिकोण का सम्मान किया। जब बात मैत्री और सामंजस्य की होती है, तो उनका उदाहरण आधुनिक समाज के लिए प्रेरणादायक साबित होता है।उनकी मुलाकातें स्थानीय कॉफी हाउस में हुआ करती थीं, जहां वे अक्सर ‘हर्सेह’ और ‘कहवे’ के साथ बैठकर गहरे विषयों पर चर्चा करते। हर्सेह और कहवे यहां केवल पेय पदार्थ नहीं, बल्कि उनका सांस्कृतिक सेतु साबित हुए हैं, जो दो अलग-अलग पृष्ठभूमि के लोगों को जोड़ते हैं। यह दोस्ती साबित करती है कि धार्मिक और सामाजिक भिन्नताओं के बावजूद बातचीत, समझदारी और सम्मान के जरिए पुल बनाए जा सकते हैं।विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की दोस्ती आधुनिक भारत में सामाजिक और धार्मिक सद्भाव का संदेश देती है। जहां लोग अक्सर अपने-अपने धार्मिक या सांस्कृतिक विचारों के विरोध में होते हैं, वहां यह कहानी सिखाती है कि सहिष्णुता और संवाद की कोई जगह हमेशा मौजूद रहती है।स्थानीय समुदायों में इस दोस्ती की चर्चा भी प्रशंसा के स्वर में हो रही है। लोग कह रहे हैं कि यह मिसाल युवा पीढ़ी के लिए बहुत जरूरी है, जो अक्सर कट्टरता और असहिष्णुता के शिकार हो जाती है। इस अनोखी दोस्ती का ही उदाहरण लेकर वे भी अपने मतभेद भूलकर एक दूसरे के प्रति सम्मान और समझ विकसित कर सकते हैं।संक्षेप में, यह कहानी न केवल दो व्यक्तियों की दोस्ती की है, बल्कि वह संदेश भी देती है कि जब हम आपसी सम्मान के साथ सामाजिक और धार्मिक मतभेदों को देखेंगे, तभी हम समृद्ध और शांतिपूर्ण समाज का निर्माण कर पाएंगे।”]}

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स्पर्म व्हेल के ‘क्लिक’ पैटर्न मानव भाषा के समान जटिल

{“title_results”:[“स्पर्म व्हेल के ‘क्लिक’ पैटर्न मानव भाषा के समान जटिल”],”content_results”:[” नई दिल्ली: समुद्री जीवन के रहस्यों को समझने में विज्ञान ने एक नया महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। शोधकर्ताओं ने हाल ही में यह पता लगाया है कि स्पर्म व्हेल, जो अपनी बातचीत के लिए खास ‘क्लिकिंग’ ध्वनियों का उपयोग करती हैं, अपनी इन आवाज़ों में […]

{“title_results”:[“बातचीत में | कादर अत्तिया के क्यूरेशन में कोच्चि-मुजिरीस बिएनाल की क्या उम्मीद रखनी चाहिए”],”content_results”:[“फ्रेंच-अल्जीरियाई कलाकार कादर अत्तिया के द्वारा कोच्चि-मुजिरीस बिएनाल की सातवीं संस्करण की क्यूरेशन एक नई दिशा लेकर आ रही है। यह आयोजन कला प्रेमियों और सामाजिक चिंैतकों के लिए एक महत्वपूर्ण प्लेटफॉर्म साबित होने जा रहा है, जहां कला के माध्यम से एक साथ रहने के नए तरीकों पर विचार-विमर्श होगा।कोच्चि-मुजिरीस बिएनाल भारत का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय समकालीन कला उत्सव है, जो हर दो साल में केरल के ऐतिहासिक शहर कोच्चि और उसकी नज़दीकी जगहों पर आयोजित होता है। इस बार कादर अत्तिया की नेतृत्व में यह आयोजन “साथ रहने की कला” पर केंद्रित रहेगा। कलाकार ने यह स्पष्ट किया है कि बिएनाल का उद्देश्य केवल कला का प्रदर्शन नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और सह-अस्तित्व के सवालों को सामने लाना है।कादर अत्तिया ने अपने पिछले कामों में भी अक्सर सामाजिक न्याय, इतिहास और सामूहिक पहचान के मुद्दों को उजागर किया है। इस बार के बिएनाल में वो ऐसी कृतियां चुनेंगे जो विभिन्न समुदायों के बीच संवाद स्थापित करें और लोगों को मिलकर रहने के तरीकों पर सोचने को प्रेरित करें। उनका मानना है कि कला एक पुल हो सकती है जो वैश्विक और स्थानीय, अतीत और वर्तमान के बीच संवाद को सुगम बनाए।इस कार्यक्रम में विभिन्न देशों से स्थापित और उभरते कलाकार भाग लेंगे, जो विभिन्न माध्यमों जैसे पेंटिंग, इंस्टालेशन, वीडियो आर्ट और प्रदर्शन कला के जरिए अपने संदेश पहुंचाएंगे। आयोजन की थीम के तहत, दर्शकों को आमंत्रित किया जाएगा कि वे न केवल कला को देखें बल्कि उसमें शामिल सामाजिक और सांस्कृतिक मुद्दों के बारे में चर्चा करें।कोच्चि-मुजिरीस बिएनाल, जो 2012 से आयोजन हो रहा है, कला के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मंच बन चुका है। कादर अत्तिया की यह पहल इस आयोजन को और भी सार्थक बनाएगी, जिससे कला और जीवन के बीच का संबंध और मजबूत होगा।यह बिएनाल 2024 के अंत में आयोजित होगी और उम्मीद की जा रही है कि यह कला और समाज के प्रति सोच को व्यापक रूप से प्रभावित करेगी। स्थानीय समुदाय की भागीदारी को भी प्रोत्साहित किया जाएगा ताकि एक समन्वित और समावेशी अनुभव उत्पन्न हो सके। इस तरह का आयोजन कला की शक्ति को सामाजिक बदलाव के लिए खोलता है, जो भारत और विश्व के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण साबित होगा।”]}

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