भारतीय फैशन का भविष्य पेरिस में नया रूप ले रहा है पेरिस, जो विश्व फैशन की राजधानी के रूप में जाना जाता है, अब भारतीय-वंश के नए डिजाइनरों के लिए एक महत्वपूर्ण मंच बन चुका है। अनिल पडिया से लेकर शार्लोट चौधरी तक, यह नई पीढ़ी पारंपरिक भारतीय शिल्प और संस्कृति की परंपराओं को एक […]
हम क्यों रुक नहीं पाते लोगों को खाना बनाते हुए देखने से
लंदन का गैलरी वीकेंड भारतीय रंग में रंगा
लंदन का गैलरी वीकेंड अब भारतीय रंग में रंगा
लंदन। दक्षिण एशियाई कला की वर्तमान स्थिति की विविधता और प्रभाव को लेकर कलाकारों और संस्थानों में उत्साह बना हुआ है। वर्तमान दक्षिण एशियाई कला आंदोलन की ताकत इसकी बहुलता में निहित है, जिसमें परंपरागत ब्लू-चिप आधुनिक कलाकारों से लेकर प्रवासी कलाकारों की विविध प्रथाएँ और हस्तशिल्प-संबंधित वार्तालाप शामिल हैं। यह बहुआयामी दृष्टिकोण न केवल […]
{“title_results”:[“एक सन्यासी और एक साधु की अनोखी दोस्ती: सबा महजूर की कॉलम”],”content_results”:[“देश में अक्सर धार्मिक मतभেদের कारण विवाद और दूरियां बढ़ती हैं, लेकिन कुछ उदाहरण ऐसे भी होते हैं जो इस धारा के विपरीत होते हैं। हाल ही में प्रकाश में आई एक अनोखी दोस्ती की कहानी ने लोगों के दिलों को छू लिया है, जहां एक नन (सन्यासी महिला) और एक ज्ञानी साधु न केवल अपने धार्मिक मतों में सहमति बनाए रखे, बल्कि वे एक-दूसरे के साथ समय बिताने और विचार-विमर्श करने में भी पीछे नहीं रहे।विवाद का विषय हो सकता था धर्म, लेकिन उनका रिश्ता इससे पूरी तरह परे था। दोनों ने कभी भी अपने धार्मिक मतों को लेकर सिर नहीं झगड़ा, बल्कि हमेशा एक-दूसरे की सोच और दृष्टिकोण का सम्मान किया। जब बात मैत्री और सामंजस्य की होती है, तो उनका उदाहरण आधुनिक समाज के लिए प्रेरणादायक साबित होता है।उनकी मुलाकातें स्थानीय कॉफी हाउस में हुआ करती थीं, जहां वे अक्सर ‘हर्सेह’ और ‘कहवे’ के साथ बैठकर गहरे विषयों पर चर्चा करते। हर्सेह और कहवे यहां केवल पेय पदार्थ नहीं, बल्कि उनका सांस्कृतिक सेतु साबित हुए हैं, जो दो अलग-अलग पृष्ठभूमि के लोगों को जोड़ते हैं। यह दोस्ती साबित करती है कि धार्मिक और सामाजिक भिन्नताओं के बावजूद बातचीत, समझदारी और सम्मान के जरिए पुल बनाए जा सकते हैं।विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की दोस्ती आधुनिक भारत में सामाजिक और धार्मिक सद्भाव का संदेश देती है। जहां लोग अक्सर अपने-अपने धार्मिक या सांस्कृतिक विचारों के विरोध में होते हैं, वहां यह कहानी सिखाती है कि सहिष्णुता और संवाद की कोई जगह हमेशा मौजूद रहती है।स्थानीय समुदायों में इस दोस्ती की चर्चा भी प्रशंसा के स्वर में हो रही है। लोग कह रहे हैं कि यह मिसाल युवा पीढ़ी के लिए बहुत जरूरी है, जो अक्सर कट्टरता और असहिष्णुता के शिकार हो जाती है। इस अनोखी दोस्ती का ही उदाहरण लेकर वे भी अपने मतभेद भूलकर एक दूसरे के प्रति सम्मान और समझ विकसित कर सकते हैं।संक्षेप में, यह कहानी न केवल दो व्यक्तियों की दोस्ती की है, बल्कि वह संदेश भी देती है कि जब हम आपसी सम्मान के साथ सामाजिक और धार्मिक मतभेदों को देखेंगे, तभी हम समृद्ध और शांतिपूर्ण समाज का निर्माण कर पाएंगे।”]}
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