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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में सीबीएसई के ऑनलाइन सिस्टम मैनेजमेंट (OSM) में आई तकनीकी खामियों को लेकर छात्रों की बढ़ती निराशा पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। अदालत ने केंद्र सरकार से इस संबंध में विस्तृत स्थिति रिपोर्ट मांगी है और कहा है कि इस असफलता के लिए व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।

इस मामले की शुरुआत एक याचिका से हुई है, जिसमें दलील दी गई है कि भारत और विदेशों में बड़ी संख्या में छात्र इस प्रणालीगत चूक से प्रभावित हुए हैं। याचिका में यह आरोप लगाया गया है कि यह विफलता ‘सिस्टमेटिक नेग्लिजेंस’ की वजह से हुई है, जिससे सरकार की देखभाल की जिम्मेदारी का उल्लंघन हुआ है।

याचिका में कहा गया है कि सीबीएसई के ऑनलाइन परीक्षा प्रबंधन में तकनीकी गड़बड़ियों ने छात्रों के लिए गंभीर परेशानियां पैदा कर दी हैं। इससे न केवल उनकी परीक्षाओं के समय में बाधा आई है, बल्कि परिणामों की विश्वसनीयता पर भी प्रश्न चिन्ह लग गया है। कई छात्र इस समस्या के कारण मानसिक तनाव और करियर में अनिश्चितता का सामना कर रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जवाबदेही तय की जानी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी समस्याएं न हों। साथ ही, सरकार से कहा गया है कि वह प्रभावित छात्रों को उचित राहत प्रदान करने की योजना बनाए। कोर्ट ने यह भी कहा कि तकनीकी गड़बड़ियों के पीछे मुख्य कारणों का पता लगाया जाए और सुधारात्मक कदम उठाए जाएं।

विशेषज्ञों के मतानुसार, आधुनिक शिक्षा प्रणाली में तकनीक की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है, इसीलिए डिजिटल प्लेटफॉर्म की विश्वसनीयता बनाए रखना अनिवार्य है। OSM जैसी प्रणालियों की गुणवत्ता पर सवाल उठना शिक्षा के डिजिटलरण के लिए चुनौतीपूर्ण है।

सरकार की ओर से इस मामले में जल्द ही सुव्यवस्थित रिपोर्ट प्रस्तुत करने की उम्मीद है। वहीं छात्रों और अभिभावकों की निगाहें अब सुप्रीम कोर्ट की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

यह मामला न केवल तकनीकी खामी का मुद्दा है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही और पारदर्शिता की मांग भी है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश ने सरकार और शिक्षा प्राधिकरणों को सुधार के लिए दबाव में ला दिया है, जिससे भारत के लाखों छात्रों को न्याय मिलने की उम्मीद जगी है।

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