नई दिल्ली: भारत के वनों और वृक्षों के समृद्ध भंडार का वैज्ञानिक अध्ययन और संरक्षण आज के पर्यावरण संरक्षण के लिए अत्यंत आवश्यक है। इस संदर्भ में, भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) के सेंटर फॉर इकोलॉजिकल साइंसेज (CES) के अति विशिष्ट प्रोफ़ेसर एवं विजिटिंग फेलो डॉ. शंकर राव ने ‘इंडिया ट्रीज एंड वेजिटेशन टाइप्स’ नामक एक नयी डिजिटल पहल की व्याख्या की है, जो देश के वृक्ष और वनस्पति संबंधी जानकारियों को एक समेकित मंच पर लाने का प्रयास है।
डॉ. राव ने बताया कि भारत में वनों की विविधता अत्यंत विशाल और जटिल है, जिसे समझना और उसके संरक्षण के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण आवश्यक है। यह डिजिटल रीसोर्स शोधकर्ताओं, नीति निर्माताओं, पर्यावरणविदों और आम जनता को वनस्पतियों के विभिन्न प्रकारों, उनकी भौगोलिक स्थिति, जैविक महत्व और पर्यावरणीय भूमिका को समझने में मदद करेगा।
इस प्लेटफॉर्म का प्रमुख उद्देश्य भारत के विभिन्न जलवायु क्षेत्रों में पाई जाने वाली पेड़ों और वनस्पति के प्रकारों का डेटा संग्रह करना और उसे सहजता से उपलब्ध कराना है, जिससे वनीकरण के प्रयास और अधिक प्रभावी एवं टिकाऊ हो सकें। वर्तमान में, वनीकरण योजनाओं में अक्सर वैज्ञानिक डेटा की कमी के कारण चुनौतियाँ आती हैं, और यह प्रणाली इस कमी को पूरा करेगी।
डॉ. राव ने आगे बताया कि यह परियोजना न केवल वैज्ञानिक रिसर्च के लिए बल्कि शैक्षिक उद्देश्यों और जागरूकता कार्यक्रमों के लिए भी महत्वपूर्ण साधन साबित होगी। विभिन्न भाषाओं में इस प्लेटफॉर्म की उपलब्धता इसे ग्रामीण क्षेत्रों तक भी पहुँचाने में सहायक सिद्ध होगी, जहाँ वृक्षारोपण और पारिस्थितिकी संरक्षण की अत्यंत आवश्यकता है।
भारत सरकार और पर्यावरण संरक्षण संबंधित संस्थानों द्वारा इस पहल का स्वागत किया गया है क्योंकि यह तकनीकी एवं ज्ञान आधारित तरीका पारंपरिक वनीकरण के प्रयासों को एक नई दिशा देगा। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक स्थानीय एवं राष्ट्रीय स्तर पर वनस्पतियों और वृक्षारोपण की प्रणालीगत समझ नहीं होगी, तब तक स्थायी पर्यावरण संरक्षण संभव नहीं है।
इस तरह के डिजिटल संसाधनों के माध्यम से न केवल वृक्षारोपण को वैज्ञानिक तौर पर बेहतर बनाया जा सकेगा, बल्कि समाज के हर वर्ग को पर्यावरण संरक्षण की दिशा में जोड़ने में मदद मिलेगी। डॉ. शंकर राव और उनके सहयोगी आगे ऐसे ही अन्य पहल करने की योजना भी बना रहे हैं, जिससे भारत के समृद्ध और विविध वन संपदा की रक्षा सुनिश्चित की जा सके।

