नई दिल्ली: ऑटोमोबाइल क्षेत्र की प्रमुख रिपोर्टिंग संस्था SIAM (एसोसिएशन ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स) ने हाल ही में वित्त वर्ष 26 के लिए वाहन बिक्री के आंकड़े जारी किए। इस रिपोर्ट के अनुसार, महाराष्ट्र राज्य ने समग्र वाहन बिक्री में शीर्ष स्थान हासिल किया है, जबकि उत्तर प्रदेश दोपहिया वाहन बिक्री के मामले में सबसे आगे रहा। इस वृद्धि का मुख्य कारण सरकार द्वारा लागू की गई जीएसटी कटौती, कर छूट और रेपो रेट में कमी के चलते लोन्स की ब्याज दर में कमी को बताया गया है।
एसआईएएम के अनुसार, निजी वाहन (Personal Vehicles) की मांग में यह बढ़ोतरी खासतौर पर वित्त वर्ष 26 के दौरान दिखाई दी, जब उपभोक्ताओं को टैक्स में राहत और वित्तीय लागत कम होने का फायदा मिला। जीएसटी की दर में कमी ने वाहन खरीद को अधिक आकर्षक बनाया, जिससे उपभोक्ता आसानी से वाहन खरीदने के लिए प्रोत्साहित हुए।
महाराष्ट्र में बढ़ती आर्थिक गतिविधियों और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर के कारण वाहन बिक्री में यह सफलता मिली है। वहीं, उत्तर प्रदेश में ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में दोपहिया वाहन की मांग में तेजी आई है, जो कि बड़े हिस्से में जनसंख्या के कारण संभव हुआ।
रेपो रेट में हो रही लगातार कटौती से लोन लेने की लागत कम हो गई है, जिससे लोग आसानी से वाहन खरीदने के लिए वित्तीय सहायता ले पा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि केंद्रीय बैंक की इस नीति से उपभोक्ता खर्च को बढ़ावा मिला है, जिससे ऑटोमोबाइल सेक्टर को मजबूती मिली है।
एसआईएएम के मुख्य प्रवक्ता ने बताया कि वाहन उद्योग में यह विकास संकेतक भारतीय अर्थव्यवस्था के स्वास्थ्य को दर्शाता है। जीएसटी की कटौती और टैक्स में छूट से बाजार में स्थिरता आई है, जिससे उपभोक्ताओं के मन में विश्वास बढ़ा है।
विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि अगर सरकार इसी तरह के प्रोत्साहन जारी रखती है, तो आने वाले वर्षों में वाहन उद्योग में और अधिक विकास देखने को मिल सकता है, जिससे रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
परिणामस्वरूप, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य वाहन बिक्री में रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन कर रहे हैं, जो देश के ऑटोमोबाइल उद्योग की प्रगति के लिए एक सकारात्मक संकेत है। इस विकास से न केवल निर्माताओं को लाभ होगा, बल्कि उपभोक्ता भी सस्ती कीमतों और बेहतर विकल्पों का आनंद ले सकेंगे।
संक्षेप में, GST कटौती, टैक्स राहत और रेपो रेट कटौती ने वाहन खरीद की प्रक्रिया को सुलभ और किफायती बनाया है, जिससे वित्त वर्ष 26 में महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में वाहन बिक्री में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई है। इस सकारात्मक रुझान के चलते भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में भविष्य उज्जवल दिख रहा है।

