तेहरान, 6 जून: ईरान के सर्वोच्च नेता आयातुल्लाह अली खमेनई के निधन पर आयोजित अंतिम संस्कार में कर्नाटक के लगभग 100 लोगों ने भाग लिया। यह कार्यक्रम तेहरान में बेहद गरिमापूर्ण माहौल में संपन्न हुआ, जिसमें देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु इकट्ठा हुए।
आयातुल्लाह खमेनई की मृत्यु के बाद उनके अंतिम संस्कार ने पूरे ईरान और अंतरराष्ट्रीय समुदाय में गहरी संवेदना और शोक की लहर दौड़ा दी। कर्नाटक के लोगों की उपस्थिति ने इस सभ्य और मार्मिक अवसर को और भी महत्वपूर्ण बना दिया।
यह दल स्थानीय राजनीतिक और धार्मिक संगठनों के सहयोग से ईरान पहुंचा था जिससे यह स्पष्ट होता है कि आयातुल्लाह खमेनई का प्रभाव सिर्फ ईरान तक सीमित नहीं बल्कि भारत के कई हिस्सों में भी महसूस किया जाता है। कर्नाटक के श्रद्धालुओं ने इस अवसर पर खमेनई के प्रति अपनी श्रद्धा और सम्मान व्यक्त किया।
अंतिम संस्कार के दौरान भारी भीड़ जुटी रही, जिसमें सुरक्षा कर्मियों ने व्यवस्था बनाए रखने का कड़ी मेहनत की। आयोजकों ने बताया कि इन लोगों का उद्देश्य इस ऐतिहासिक क्षण का हिस्सा बनना और उनकी शिक्षाओं को याद करना था।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की उपस्थिति से यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि धार्मिक और राजनीतिक नेतृत्व का असर सीमाओं को पार कर दूर-दूर तक पहुंचता है। कर्नाटक के प्रतिनिधि दल ने भी अपनी भावनाओं और विचारों को सार्वजनिक मंच पर रखा।
इस मौके पर कर्नाटक के लोगों ने शोक सभा में हिस्सा लिया, जहां कविताएं, प्रार्थनाएं और खमेनई के जीवन पर चर्चा हुई। इस दौरान यह उल्लेखनीय रहा कि उनके कार्य और विचार युवा पीढ़ी को भी प्रेरित करते हैं।
आयातुल्लाह खमेनई के अंतिम संस्कार में कर्नाटक के लगभग 100 लोगों की उपस्थिति ने एक बार फिर धार्मिक सौहार्द और अंतरराष्ट्रीय भाईचारे को मजबूत करने की भूमिका निभाई है। यह घटना दो देशों के बीच सांस्कृतिक और धार्मिक संबंधों को और प्रगाढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

