नई दिल्ली: HDFC बैंक के प्रबंध निदेशक सशिधर जोगीशन ने FY27 के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि और मुद्रास्फीति के दृष्टिकोण पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि एल-नीनो के प्रभाव और सामान्य से कम मानसून की स्थिति देश की आर्थिक प्रगति के लिए जोखिम उत्पन्न कर सकती है। साथ ही, वैश्विक व्यापार के खंडन, भू-राजनीतिक तनाव और बाहरी वित्तीय बाजारों की अस्थिरता भी सतर्कता और जोखिम प्रबंधन की जरूरत को बढ़ा रही है।
सशिधर जोगीशन ने एक आधिकारिक बयान में कहा, “वैश्विक व्यापार में फ्रैगमेंटेशन, भू-राजनीतिक टकराव और वित्तीय बाजारों में अस्थिरता से उत्पन्न जोखिम पूरे वित्तीय क्षेत्र में सतर्कता और व्यावहारिक जोखिम प्रबंधन की आवश्यकता को मजबूती से दर्शाते हैं।” उन्होंने यह भी सचेत किया कि ये बाहरी कारक भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिरता और विकास पर प्रभाव डाल सकते हैं, इसलिए सावधानीपूर्वक रणनीति और नीतिगत फैसले आवश्यक हैं।
एल-नीनो की वजह से आने वाले मानसून में कमी आने की संभावना है, जो कृषि उत्पादन खासकर खरीफ फसलों को प्रभावित कर सकता है। कृषि क्षेत्र भारत की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और मानसून की अनियमितता से ग्रामीण आय और उपभोग दोनों प्रभावित हो सकते हैं। इस कारण से यह न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था बल्कि पूरे आर्थिक विकास के लिए एक बड़ा जोखिम माना जा रहा है।
इतना ही नहीं, कम मानसून का असर जल संसाधन, उद्योग और ऊर्जा उत्पादन पर भी पड़ सकता है। जल स्तर में कमी से सिंचाई, विद्युत उत्पादन और अन्य जल-आश्रित उद्योग प्रभावित होंगे, जो अर्थव्यवस्था के सुदृढ़ विकास में बाधा उत्पन्न कर सकता है।
अर्थशास्त्रियों के अनुसार, FY27 में मुद्रास्फीति की संभावनाएँ बढ़ सकती हैं, क्योंकि सूखे या कमजोर मानसून से खाद्य पदार्थों की कमी हो सकती है और यह वस्तुओं की कीमतों पर प्रभाव डालेगा। इसके अलावा, वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में उतार-चढ़ाव भी मुद्रास्फीति दबाव को बढ़ा सकता है।
भारतीय रिजर्व बैंक और वित्त मंत्रालय को इन जोखिमों को ध्यान में रखते हुए महंगाई नियंत्रण और आर्थिक विकास के लिए संतुलित नीतियाँ बनानी होंगी। विकास को बनाए रखने के लिए निवेश, उद्यमिता और निर्यात को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ संकट प्रबंधन तंत्र को भी सशक्त करना जरूरी होगा।
सशिधर जोगीशन ने यह भी माना कि वित्तीय संस्थानों को इन बाहरी और आंतरिक चुनौतियों के बीच सावधानी पूर्वक अपनी रणनीतियाँ तैयार रखनी चाहिए। बेहतर जोखिम प्रबंधन, संवाद और जवाबदेही के माध्यम से वित्तीय स्थिरता को कायम रखना होगा।
साथ ही उन्होंने संकेत दिया कि वैश्विक आर्थिक माहौल में अनिश्चितता बनी रहेगी, अतः निवेशकों और व्यवसायों के लिए भी यह आवश्यक होगा कि वे सतर्क रहें और किसी भी संभावित व्यवधान के लिए तैयार रहें।
इस प्रकार, एल-नीनो और कमजोर मानसून FY27 की आर्थिक योजना में बड़ी चुनौती साबित हो सकते हैं, जो सरकार और उद्योग दोनों के लिए सतत निगरानी और योजना बनाने की आवश्यकता को दर्शाता है।

