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एक साल पहले रिलीज़ होने वाली राज मोरे निर्देशित मराठी फिल्म ‘खालिद के शिवाजी’ का थिएटरों में प्रदर्शन रुक गया था। एक साल बाद यह फिल्म सीधे OTT प्लेटफॉर्म पर रिलीज़ हुई, जिससे फिल्म प्रेमियों में कई सवाल पैदा हुए। फिल्म के डेब्यू डायरेक्टर ने इस मुद्दे पर खुलकर बात की और बताया कि किस प्रकार वितरक इसे सिनेमाघरों तक नहीं पहुंचाना चाहते थे।

राज मोरे ने कहा कि फिल्म का विषय और थीम कुछ वितरकों के लिए स्वीकार्य नहीं थी, जिससे उन्हें थिएटर रिलीज़ हेतु समर्थन नहीं मिला। इस बात ने निर्देशक और टीम दोनों को काफी निराश किया। उन्होंने बताया कि इंडस्ट्री से अपेक्षित मदद न मिलने के कारण उन्हें alternative रास्ता अपनाना पड़ा और OTT प्लेटफॉर्म पर फिल्म को रिलीज़ करने की योजना बनाई।

फिल्म में किए गए बदलावों पर भी निर्देशक ने चर्चा की। उन्होंने कहा कि पिछले साल से अब तक कहानी में कुछ छोटे-मोटे परिवर्तन किये गए हैं, ताकि दर्शकों को बेहतर अनुभव मिले। निर्देशक के अनुसार, OTT रिलीज़ ने फिल्म को एक नई जिंदगी दी है क्योंकि अब यह कई दर्शकों तक पहुंच रही है, जो शायद थिएटर तक नहीं पहुंच पाती।

डायरेक्टर ने यह भी स्पष्ट किया कि फिल्म वितरकों द्वारा स्वीकार नहीं किए जाने की मुख्य वजह विषय की संवेदनशीलता और बाजार का रिस्क लेना न चाहना था। इसके बावजूद, ‘खालिद के शिवाजी’ OTT पर अच्छी प्रतिक्रिया पा रही है जो दर्शाती है कि दर्शक नई और विशेष कहानियां देखना पसंद करते हैं।

फिल्म के OTT रिलीज़ का यह फैसला फिल्म इंडस्ट्री में नई राह दिखाता है, जहाँ कई नई और नयी सोच वाली फिल्मों को थिएटर में जगह न मिल पाने पर डिजिटल माध्यमों का सहारा लेना पड़ता है। राज मोरे ने अपने अनुभव साझा करते हुए यह उम्मीद जताई कि आने वाले समय में मराठी इंडस्ट्री और भी अधिक प्रगति करेगी और नई प्रतिभाओं को बेहतर मंच मिलेगा।

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