लंदन: इंग्लैंड में क्रिकेट के लिए यह महीना बेहद महत्वपूर्ण था, लेकिन इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ECB) की भूमिका ने इस अवसर को छुपा दिया है। महिला क्रिकेट के प्रति उपेक्षा और पुरुषों के टेस्ट मैच की घटनाओं ने खेल की छवि को प्रभावित किया है।
यह महीना महिला क्रिकेट के लिए नई ऊंचाईयों को छूने का था, जहां बड़ी संख्या में दर्शकों ने महिलाओं के खेल की सराहना की। हालांकि, पुरुषों के टेस्ट मैच के दौरान हुई विवादास्पद घटनाओं ने मीडिया का पूरा ध्यान आकर्षित कर लिया और महिला क्रिकेट की उपलब्धियां दबकर रह गईं।
विशेषज्ञों का कहना है कि ECB ने इस स्थिति को भड़काने में अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग दिया है। उन्होंने कहा कि बोर्ड को महिला क्रिकेट को समान रूप से प्रोत्साहित करना चाहिए था और सकारात्मक खबरों को भी प्रमुखता देनी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
यह स्थिति इंग्लैंड क्रिकेट के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि समानता और दोनों लिंगों के क्रिकेट के विकास को साथ लेकर चलना अब समय की जरूरत है। महिला क्रिकेट न केवल खेल की गुणवत्ता में सुधार कर रही है, बल्कि दर्शकों की संख्या में भी आश्चर्यजनक बढ़ोतरी हो रही है।
विश्लेषकों ने यह भी कहा कि मीडिया को भी अपनी भूमिका समझनी होगी और महिलाओं के क्रिकेट को वह सम्मान और कवरेज देनी चाहिए जो वे वास्तविक तौर पर हकदार हैं। जब तक पुरुष क्रिकेट के विवाद overshadow नहीं होंगे, तब तक महिलाओं के क्रिकेट को उचित मंच नहीं मिल पाएगा।
इस मौके पर ECB को चाहिए कि वे महिला क्रिकेट के लिए एक मजबूत नीति और प्रचार अभियान शुरू करें जिससे कि महिलाएं भी क्रिकेट में समान अवसर पाएं और खेल का संतुलित विकास हो सके।
अंतत: यह दौर इंग्लैंड क्रिकेट के लिए बदलाव का समय है, जहां सभी खिलाड़ियों और प्रशंसकों के लिए समान अवसर और सम्मान की बात हो। महिला क्रिकेट को नजरअंदाज करना न केवल अनुचित है, बल्कि खेल की पूर्णता को भी प्रभावित करता है।

