पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार के सत्ता में आने के बाद से कई सरकारी इमारतों, सड़कों और नागरिक संरचनाओं में रंग परिवर्तन के प्रचलन ने सामाजिक और राजनीतिक सरगर्मियों को बढ़ावा दिया है। विशेष रूप से, राज्य सचिवालय नବَن্নा के कुछ हिस्सों में बदलाव देखे गए हैं, जो प्रदेश की प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर प्रभाव डाल रहे हैं।
हाल ही में अकादमी ऑफ फाइन आर्ट्स की सुरक्षा कक्ष के अंदर सुरक्षा कर्मचारियों द्वारा सजावट में केसरिया रंग का उपयोग विवादास्पद रहा। इस रंग परिवर्तन को लेकर स्थानीय थिएटर कलाकारों में तीव्र असंतोष व्याप्त है। उनका मानना है कि कला संस्थानों में इस तरह के राजनीतिक रंग परिवर्तनों को मजबूर करना सांस्कृतिक विविधता तथा स्वतन्त्रता पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।
थिएटर कलाकारों ने राज्य भाजपा प्रमुख को लिखे एक पत्र में अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि कला की स्वतंत्रता को बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है, और किसी भी प्रकार के राजनीतिक हस्तक्षेप से इसे नुक़सान पहुँचना अस्वीकार्य है। कलाकारों ने अपील की है कि प्रशासनिक स्तर पर इस दिशा में उचित कार्रवाई की जाए ताकि कलात्मक संस्थान निरपेक्ष रह सकें।
साथ ही, रंग परिवर्तन की बात केवल अकादमी तक सीमित नहीं है। कई अन्य सरकारी कार्यालय, शिक्षा संस्थान और सार्वजनिक स्थानों में भी हाल के महीनों में रंग रूपांतरणों का गौरवपूर्ण इतिहास सामने आ रहा है। विरोधी दलों और सामाजिक संगठनों ने इसे स्थानीय सांस्कृतिक पहचान के विरुद्ध कदम बताया है।
दूसरी ओर, भाजपा सरकार का कहना है कि रंग परिवर्तन एक पहचान और विकास के प्रतीक स्वरूप किया जा रहा है। सरकार का तर्क है कि इसका उद्देश्य राज्य की नई छवि को दर्शाना है और इस प्रक्रिया में किसी भी सांस्कृतिक संवेदनशीलता की अवहेलना नहीं हुई।
राज्य की जनता में इस विषय को लेकर मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोग इसे बदलाव एवं विकास के पक्ष में मानते हैं, जबकि अन्य इसे इतिहास और सांस्कृतिक विरासत के साथ खिलवाड़ के रूप में देखते हैं।
विश्लेषकों के अनुसार, रंग जैसे प्रतीकात्मक तत्वों का सांस्कृतिक और सामाजिक संदर्भों में बड़ा महत्व होता है। इसलिए, किसी भी रंग परिवर्तन को संवेदनशीलता से उद्यम करना चाहिए और विभिन्न समुदायों की भावनाओं का सम्मान करना आवश्यक है।
अंततः यह विवाद पश्चिम बंगाल के सांस्कृतिक तथा राजनीतिक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण संकेत पेश करता है, जहां कला, राजनीति और सामाजिक चेतना का संगम होता है। इस मुद्दे का समाधान संवाद और सभी पक्षों की सहमति से ही संभव होगा।

