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बंगलूरु. जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और पारिस्थितिकी तंत्र में हो रही हानि के बीच, कलाकार श्रुति नागराज ने आम के मौसम को एक नए दृष्टिकोण से दस्तावेज़ करने का अनूठा प्रयास किया है। उनका प्रोजेक्ट “मावु” आम की विभिन्न किस्मों के विकास, खपत और क्षय के जीवन चक्र को ASCII टाइपोग्राफिक प्रतीकों और 3D स्कैनिंग तकनीक की मदद से मानचित्रित करता है। यह परियोजना अपने नवीनतम रूप में पहली बार लंदन के सैची गैलरी में प्रदर्शित की गई थी और जल्द ही भारत में भी इसे प्रस्तुत करने की योजना है।

श्रुति नागराज का यह प्रोजेक्ट पर्यावरणीय बदलावों के प्रभावों को समझने और आम प्रजातियों की जैव विविधता को संरक्षित करने के लिए एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है। इस तकनीकी और कलात्मक मिश्रण के जरिए, वह लोगों को आम की जीवन चक्र की एक बारीक और सटीक तस्वीर दिखाती हैं, जो आम तौर पर दिखायी नहीं जाती।

शहर के पर्यावरणविद और कृषि विशेषज्ञ इस पहल की सराहना कर रहे हैं क्योंकि यह न केवल हमारी पारंपरिक फलों की क़िस्मों के संरक्षण के महत्व को उजागर करता है, बल्कि जलवायु परिवर्तन से जुड़ी चुनौतियों को भी सामने लाता है। “मावु” परियोजना 3D स्कैन तकनीक का उपयोग कर प्रत्येक आम की विशेषताओं, जैसे उनकी बनावट, आकार और रंग को डिजिटल रूप में कैप्चर करती है। इसके साथ ही ASCII कला के माध्यम से आम की वृद्धि और क्षय के चरणों को चित्रित किया जाता है, जिससे एक अनूठी दृष्टि बनती है।

श्रुति का कहना है कि इस तरह के कलात्मक और वैज्ञानिक प्रयास न केवल पर्यावरण जागरूकता फैलाते हैं बल्कि स्थानीय किसानों और उपभोक्ताओं को भी अपनी फसलों और उनके पर्यावरणीय मूल्य के प्रति सजग बनाते हैं। “मावु” परियोजना भविष्य में भारत के विभिन्न क्षेत्रों में आम के संरक्षण और जलवायु परिवर्तन के अनुकूलन के लिए संसाधन के रूप में कार्य करने की उम्मीद रखती है।

सैची गैलरी में प्रदर्शित इस परियोजना को देखने वाले दर्शकों ने इसे अत्यंत प्रभावशाली और जागरूकता बढ़ाने वाला बताया। उनकी प्रतिक्रिया के अनुसार यह परियोजना तकनीक और कला के माध्यम से पर्यावरण विषयों को अधिक सुलभ और समझने योग्य बनाती है। भारत आने के बाद, “मावु” की प्रदर्शनी का उद्देश्य स्थानीय आम प्रजातियों के महत्व को बढ़ावा देना और उन्हें संरक्षण का संदेश देना होगा।

पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन के संदर्भ में इस तरह की पहल महत्वपूर्ण हैं क्योंकि वे समाज के हर वर्ग तक संदेश पहुंचाने में सक्षम होती हैं। श्रुति नागराज का यह प्रोजेक्ट निस्संदेह बंगलूरु और अन्य क्षेत्रों में आम की विभिन्न किस्मों के प्रति लोगों की जागरूकता बढ़ाएगा और पारिस्थितिक संकट से निपटने में मदद करेगा।

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