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US plans return to supersonic flights with new FAA rule; to reverse 53-year-old ban
संयुक्त राज्य अमेरिका ने 53 साल पुराने प्रतिबंध को खत्म कर सुपरसोनिक उड़ानों की वापसी के लिए FAA नियम बनाया
SC orders status quo on Karnataka HC direction to reopen ethanol allocation process
कर्नाटक उच्च न्यायालय के ईथेनॉल आवंटन प्रक्रिया पुनः खोलने के निर्देश पर सर्वोच्च न्यायालय ने स्थिति को बनाये रखने का आदेश दिया
MDMK’s general body to take a decision on alliance on Saturday
एमडीएमके की जनरल बॉडी शनिवार को गठबंधन पर निर्णय लेगी
Women with PMOS should have yearly NHS checks, says health watchdog
पीएमओएस से पीड़ित महिलाओं को NHS जांचें वार्षिक रूप से करानी चाहिए: स्वास्थ्य निगरानी संस्था की सिफारिश
‘Akane-banashi’ series review: Jubilant rakugo revival is a sleeper shonen hit
अकाने-बनाशी सीरीज समीक्षा: उल्लसित रकुगो पुनरुद्धार एक अप्रत्याशित शॉनेन हिट है
Brook: Test captaincy would be 'great honour', as focus turns to India T20I
ब्रुक: टेस्ट कप्तानी एक “महान सम्मान” होगी, अब भारतीय टी20आई पर ध्यान केंद्रित
Madayi Kavu | The Sacred Abode of Goddess Bhadrakali in Kannur
मडई कावु | कन्नूर में देवी भद्रकाली का पवित्र आवास
How ‘natural’ biohacking can help you optimise your health and life
कैसे ‘प्राकृतिक’ बायोहैकिंग आपकी सेहत और जीवन को बेहतर बना सकती है
Daily Quiz | On Albert Einstein’s June 30, 1905 paper
अल्बर्ट आइंस्टीन के 30 जून 1905 के पेपर पर दैनिक क्विज़
How dual-use satellites are blurring the lines of modern space war

1967 का बाहरी अंतरिक्ष संधि एवं अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून युद्ध के दौरान नागरिक और सैन्य लक्ष्यों के बीच स्पष्ट भेद करने पर जोर देता है। यह सिद्धांत युद्धरत पक्षों को नागरिक वस्तुओं और सैन्य लक्ष्यों के बीच अंतर करने की जिम्मेदारी देता है। लेकिन आधुनिक समय की तकनीकी प्रगति ने इस प्रक्रिया को चुनौतीपूर्ण बना दिया है, खासकर जब बात आती है द्वैत-उपयोग (dual-use) उपग्रहों की।

द्वैत-उपयोग उपग्रह वे उपकरण हैं जिन्हें एक ही समय में सैन्य और नागरिक दोनों उद्देश्यों के लिए उपयोग किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, कोई उपग्रह संचार, मौसम विज्ञान और विशेषज्ञ सैटेलाइट इमेजिंग के लिए संचालित हो सकता है, साथ ही युद्ध प्रबंधन, टोही और सैन्य संचार में भी। इस प्रकार के उपग्रह युद्ध के नियमों के तहत पारंपरिक लक्ष्यों की परिभाषा को चुनौती देते हैं क्योंकि वे स्पष्ट रूप से सिर्फ सैन्य या सिर्फ नागरिक नहीं होते।

अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार और युद्ध के नियम, विशेषकर आत्मरक्षा की स्थिति में सैन्य कार्रवाई करते समय, नागरिकों और नागरिक वस्तुओं की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देते हैं। लेकिन द्वैत-उपयोग उपग्रह इस सुरक्षा कवच को कमजोर कर सकते हैं। यदि एक उपग्रह का कोई हिस्सा या पूरा उसे सैन्य उद्देश्यों के लिए उपयोग किया जाए, तब क्या वह पूरा उपग्रह हमला करने योग्य लक्ष्य बन जाता है? इस प्रश्न का उत्तर सरल नहीं है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक अंतरिक्ष युग में द्वैत-उपयोग उपग्रह सुरक्षा नियमों और अंतरिक्ष संधि के सिद्धांतों के बीच तनाव पैदा कर रहे हैं। इसके कारण, वॉरफेयर की नई रणनीतियों, नीति निर्धारण, और कानूनी ढांचे की पुनः समीक्षा आवश्यक हो गई है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि अंतरिक्ष में कोई भी सैन्य कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय कानूनों के अनुरूप हो और अनावश्यक नागरिक नुकसान से बचा जा सके।

साथ ही, देशों को भी अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने और पारदर्शिता बरतने की आवश्यकता है ताकि ये उपकरण युद्ध के अंतर्गत कब और कैसे लक्षित किए जा सकते हैं, इस सवाल पर दो तरफा समझौता हो सके। युद्ध के नियमों के तहत अधिक स्पष्ट दिशानिर्देश बनाए जाने से ही आधुनिक द्वैत-उपयोग उपग्रहों की जटिलताओं से निपटा जा सकेगा।

संक्षेप में, द्वैत-उपयोग उपग्रह आधुनिक अंतरिक्ष युद्ध की सीमा रेखाओं को धुंधला कर रहे हैं और इस समय अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने एक बड़ा कानूनी तथा नीतिगत सवाल खड़ा कर रहे हैं। इसके समाधान के लिए बहुपक्षीय प्रयास और नए अंतरिक्ष युद्ध नियमों का निर्माण अनिवार्य है। यही तरीका है जिससे हम भविष्य के अंतरिक्ष संघर्षों को अधिक सुरक्षित और न्यायसंगत बना सकते हैं।

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