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ढाका. बांग्लादेश में खसरे के मामलों में अचानक तेजी से बढ़ोत्तरी ने स्वास्थ्य व्यवस्था को चुनौती दे दी है। हाल ही में 120,000 से अधिक संदिग्ध और पुष्ट खसरे के मामले सामने आए हैं, जिनसे अस्पतालों पर अत्यधिक दबाव पड़ गया है। इस महामारी ने देश की स्वास्थ्य प्रणाली की कमजोरियों को उजागर कर दिया है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां स्वास्थ्य सेवाएं सीमित हैं।

खसरा, जो एक अत्यंत संक्रामक वायरल रोग है, बच्चों के बीच तेजी से फैल रहा है, और इसके कारण होने वाली जटिलताएं गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न कर रही हैं। हालांकि बांग्लादेश ने पिछले वर्षों में खसरे पर नियंत्रण के लिए बड़े कदम उठाए थे, लेकिन ये हालिया मामलों की लहर चिंता का कारण बनी है।

स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, इस महामारी की बड़ी वजह वैक्सीनेशन कवरेज में कमी और ग़ैर-मान्य कुछ इलाकों में स्वास्थ्य जागरूकता का अभाव है। इसके अलावा, कोविड-19 महामारी के दौरान बाधित स्वास्थ्य सेवाएं भी इस खसरे की बढ़ोतरी में योगदान देने वाली एक वजह रही हैं।

अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढऩे से चिकित्सकों तथा नर्सिंग स्टाफ पर दबाव बढ़ गया है। कई अस्पतालों को विशेषज्ञ डॉक्टरों और आवश्यक दवाइयों की कमी का सामना करना पड़ रहा है। यही कारण है कि मरीजों को सही और समय पर इलाज नहीं मिल पाता, जिसके कारण मौतों की संख्या बढ़ने लगी है।

सरकार ने खसरे के मामलों को रोकने के लिए अनेक अभियान शुरू किए हैं, जिनमें बीमारियों की पहचान, वैक्सीनेशन ड्राइव और जागरूकता कार्यक्रम शामिल हैं। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि केवल अभियान ही काफी नहीं हैं, पूर्ण टीकाकरण कवरेज सुनिश्चित करना आवश्यक है ताकि बच्चों को इस जानलेवा रोग से बचाया जा सके।

सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने नागरिकों से भी आग्रह किया है कि वे अपने बच्चों को समय पर सभी आवश्यक टीके लगवाएं और किसी भी बीमारी के लक्षण दिखने पर तुरंत चिकित्सकीय सहायता लें। साथ ही, सरकार से कड़े उपाय करने और स्वास्थ्य सेवा सुविधाओं को मजबूत करने की भी मांग की जा रही है।

बांग्लादेश में खसरे की यह बढ़ती महामारी विश्व स्वास्थ्य समुदाय के लिए भी चिंता का विषय बनी हुई है, क्योंकि यह साबित करता है कि विकासशील देशों में जब तक टीकाकरण का व्यापक और सुव्यवस्थित कवरेज नहीं होगा, तब तक ऐसे रोगों का प्रभाव पूरी तरह समाप्त नहीं हो सकता।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों की राय में, बांग्लादेश को खसरे से लड़ने के लिए सतत प्रयास और व्यापक नीति क्रियान्वयन करने होंगे, जिससे देश में बच्चों की जान बच सके और भविष्य में इस प्रकार की बड़ी स्वास्थ्य संकट की स्थितियों से बचा जा सके।

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