शिलांग। मेघालय के शेफ्स अब पारंपरिक व्यंजनों की बहाली कर राज्य की समृद्ध पाक पहचान को पुनः स्थापित करने में लगे हुए हैं। A’Origins, Rynsan और Lady Aiko जैसे प्रतिष्ठित रेस्टोरेंट्स के पीछे के शेफ्स अपने मेन्यू में खासतौर पर किण्वित बाँस की शूट, धूम्रपान किए हुए मांस, जंगल के उत्पादों और पारंपरिक पकाने की तकनीकों का उपयोग कर नए-नए व्यंजन तैयार कर रहे हैं।
पूर्वोत्तर भारत का यह खूबसूरत राज्य अपनी प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ विविध जातीय समुदायों की सांस्कृतिक विरासत के लिए जाना जाता है। विगत वर्षों में ग्लोबलाइज़ेशन के कारण यहां के पारंपरिक भोजन का प्रभाव कमजोर पड़ गया था, लेकिन अब युवा शेफ्स पारंपरिक स्वादों को सजगता से पुनर्जीवित कर रहे हैं। मेघालय की उन्नीसवीं सदी से चली आ रही खाना पकाने की परंपराओं और स्थानीय सामग्री को आज की डाइनिंग के अनुकूल परोसना उनका लक्ष्य है।
A’Origins के शेफ ने बताया, “हम अपने व्यंजनों में स्थानीय किण्वित बाँस की शूट का उपयोग करते हैं, जो मेघालय की पाक संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह न केवल स्वाद में बढ़ोतरी करता है बल्कि स्वास्थ्य के लिहाज से भी लाभदायक है।” इसी तरह Rynsan ने पारंपरिक लोकल मसालों और धूम्रपान किए हुए मांस को पुनः लोकप्रिय बनाने का काम किया है।
Lady Aiko में पर्यटक और स्थानीय लोग दोनों को पारंपरिक शेफ तकनीकों के संगम से गहराई से जुड़ने का मौका मिलता है। उनका मानना है कि भोजन केवल पेट भरने का जरिया नहीं, बल्कि संस्कृति, इतिहास और सामुदायिक जुड़ाव का प्रतीक भी है। शेफ्स ने यह भी कहा है कि पारंपरिक खाद्य उत्पादों का संरक्षण और उनका सही प्रजुलाईकरण भविष्य की पीढ़ियों के लिए अतिआवश्यक है।
विशेषज्ञों का कहना है कि मेघालय के यह प्रयास न केवल स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा देंगे, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी क्षेत्रीय व्यंजनों की पहचान मजबूत करेंगे। इसके लिए राज्य सरकार भी सहयोग कर रही है, जिससे स्थानीय किसानों और उत्पादकों को मदद मिलती है और उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार होता है।
संक्षेप में कहा जाए तो मेघालय के इन समर्पित शेफ्स की पहल राज्य के पाक धरोहर को जीवित रखते हुए उसे आधुनिक दुनिया के स्वादों के साथ संतुलित कर रही है। इससे मेघालय का नाम न केवल प्राकृतिक सुंदरता बल्कि भोजन कला के क्षेत्र में भी चमक रहा है।

