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स्रीनिवास डेंचनाला: थिएटर से बेअवाज़ों की आवाज़ बनने की यात्रा

जनपदम के संस्थापक, नाटककार और निर्देशक स्रीनिवास डेंचनाला ने चार दशकों से अधिक समय से थिएटर के माध्यम से समाज के वंचित और अल्पसंख्यक वर्गों की आवाज़ को जोर-शोर से बाहर लाने का काम किया है। हाल ही में उन्होंने अपने नए तेलुगु नाटक “नीलवेनि” के बारे में अपनी राय साझा की, जो सामाजिक मुद्दों को गहराई से उजागर करता है।

डेंचनाला ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि उनका उद्देश्य थिएटर के जरिये जनमानस तक उन कहानियों को पहुँचाना है जिन्हें अक्सर मुख्यधारा की मीडिया या साहित्य में जगह नहीं मिलती। “नीलवेनि” नाटक भी इसी सोच का उत्पाद है, जिसे उन्होंने सामाजिक न्याय और समानता के संदेश के साथ मंचित किया है।

उनके अनुसार, थिएटर केवल मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि यह सामाजिक बदलाव का एक प्रभावशाली माध्यम भी है। उन्होंने बताया कि पिछले 40 वर्षों में उन्होंने अनेक नाटकों का निर्देशन किया, जो गरीब, दलित, महिला और आदिवासी समुदायों के संघर्ष और अनुभवों को बयां करते हैं।

जनपदम के तहत उन्होंने अनेक सांस्कृतिक मंच तैयार किए हैं ताकि स्थानीय कलाकारों को मंच प्रदान किया जा सके और सामाजिक मुद्दों पर संवाद शुरू हो सके। उनका उल्लेख था कि “नीलवेनि” नाटक में हमने उन लोगों की आवाज़ को मंच पर लाने की कोशिश की है जिन्हें आज भी समाज में अनदेखा किया जाता है।

स्रीनिवास डेंचनाला का यह दृष्टिकोण कई सामाजिक एक्टिविस्टों और कलाकारों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि थिएटर की शक्ति न केवल समस्या को उजागर करने में है, बल्कि समाधान खोजने और समुदाय को जोड़ने में भी है।

इस नाटक की प्रमुख विशेषता इसकी प्रामाणिकता और भावनात्मक प्रभाव है, जो दर्शकों को सामाजिक बदलाव के लिए सोचने पर मजबूर कर देता है। स्रीनिवास के अनुसार, “थिएटर समाज की प्रतिबिंब है, और इसे हर वर्ग तक पहुंचाना मेरा मकसद है।”

आगे बताते हुए उन्होंने कहा कि आने वाले समय में भी वे नए सामाजिक मुद्दों को उठाते रहेंगे और युवाओं को इस माध्यम के प्रति जागरूक करेंगे ताकि नई पीढ़ी भी इस सतत परिवर्तन के अभियान में भागीदार बने।

सारांश में, स्रीनिवास डेंचनाला की यह यात्रा न केवल थिएटर के संरक्षण की कहानी है, बल्कि एक सामाजिक उत्तरदायित्व की भी कहानी है, जिसने उन्हें वर्षों तक आवाज़ रहितों का मुखर प्रतिनिधि बनाया है। उनके नाटकों के माध्यम से समाज में सामाजिक न्याय और समानता के मूल्य फैलाने की जो पहल हुई है, वह आने वाले समय तक जारी रहने की उम्मीद है।

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